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धनुर्मास, मलमास, खरमास, २०७८ गुरूवार १६ दिसम्बर से १४ जनवरी २०२२ तक

इस वर्ष 16 दिसंबर, 2021 से लेकर 14 जनवरी, 2022 तक खरमास लग रहा है। चतुर्मास की तरह खरमास में भी कोई मांगलिक यानी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं कर सकते हैं। खरमास समाप्त होने के बाद मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।



क्यों खरमास में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं ?

खरमास के दिनों में सूर्य देव धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके चलते बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। वहीं, गुरु ग्रह को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। लड़कियों की शादी के कारक गुरु माने जाते हैं। गुरु कमजोर रहने से शादी में देर होती है। साथ ही रोजगार और कारोबार में भी बाधा आती है। इसके चलते खरमास के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। विवाह के लिए शुक्र और गुरु दोनों का उदय होना आवश्यक है। यदि दोनों में से एक भी अस्त होगा तो मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

धनुर्मास महत्व कथा व्रत पूजा विधि

धनुर्मास महत्व कथा व्रत पूजा विधि भारत के दक्षिण भाग में यह तीस दिवसीय त्यौहार विस्तार से मनाया जाता हैं. धनुर्मास तीस दिनों का त्यौहार होता है, जिसमे खासतौर पर भगवान विष्णु की उपासना की जाती हैं. यह त्यौहार खासतौर पर दक्षिण भारत में मनाया जाता हैं. भक्ति के भाव को जगाने के लिए इस महीने में धार्मिक कर्मो के अलावा अन्य कार्यो जैसे शादी मुंडन आदि को करना निषेद माना जाता है. जिससे मनुष्य का मन विचलित न हो और वो पुरे मन से ईश्वर उपासना करें. इस प्रकार पुराणों के अनुसार इन दिनों शादी की कोई उपयुक्त तिथी नहीं निकलती. भगवान वैकुंठ नाथ की पूजा का महत्व होता है, इसलिए इन दिनों में आने वाली एकादशी को वैकुण्ठ एकादशी कहा जाता हैं इस दिन का धनुर्मास ने सर्वाधिक महत्व होता हैं.

कब मनाया जाता हैं धनुर्मास

धनुर्मास तीस दिनों का त्यौहार है, जो कि मध्य मार्गशीर्ष से शुरू होकर मध्य पौष में खत्म होता हैं. इस प्रकार यह 16 दिसम्बर से शुरू होकर 14 जनवरी को खत्म होगा. यह मास मकर संक्रांति पर खत्म होता हैं. जब सूर्य धनु राशी में प्रवेश करता है, तब धनुर्मास का प्रारंभ होता है, जिसे धनु संक्रांति कहते हैं.

जब सूर्य कर्क रेखा से उत्तर की तरफ बढ़ता हैं और मकर राशी में प्रवेश करता हैं तब उत्तरायण होता है और इसके विपरीत दक्षियायण होता हैं. अर्थात धनुर्मास उत्तरायण के समय होता हैं.

धनुर्मास को धनुमास, चाप मास, कोदंडा मास, कार्मुका मास भी कहा जाता हैं. धनु का अर्थ धनुष से होता हैं. अतः इसे शून्य मास भी कहा जाता हैं.

धनुर्मास धनु मास पूजा विधि एवम महत्व

· इन दिनों भगवान विष्णु की उपासना का महत्व होता हैं.

· इन दिनों अन्य उत्सव जैसे शादी, मुंडन आदि करना निषेध माना जाता हैं.

· इन दिनों सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता हैं और सूर्य उदय के आधे घंटे पहले पूजा की जाती हैं. इसे ब्रह्ममुहूर्त में होने वाली पूजा कहा जाता हैं.

· इन दिनों विष्णु भगवान के श्लोको का उच्चारण किया जाता हैं.

· इन दिनों गरीबो एवम ब्राह्मणों को दान दिया जाता हैं.

· इन दिनों विष्णु की उपासना हजार वर्षों की उपासना के समान मानी जाती हैं.

· इस पुरे मास वेंकटेश स्त्रोत का पाठ किया जाता हैं.

· मंदिरों में वेंकट आरती की जाती हैं.

धनुर्मास उत्सव की धूम पुरे तीस दिन तक रहती हैं. यह दक्षिणी भारत का विशेष पर्व हैं इसके नियम व महत्त्व चौमासा या चातुर्मास व्रत के समान ही होते हैं.

- DR. B.L.TEKDIWAL

VISHWASHANTI PARIWAR

MUMBAI

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