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नारी

रेखा जाजोदिया

1 मार्च 2023

जननी है वो इस जग की,
हम सब की भाग्य विधाता है।

जननी है वो इस जग की,

हम सब की भाग्य विधाता है।

कभी आंचल में नीर,

कभी आंखों में पानी लिए;

एक औरत है वो, एक माता है।

उदारता की वो मूरत है,

निर्विकार उसकी सूरत है;

मां, बेटी,बहन, भाभी;

हर रूप में वो खूबसूरत है।

कभी फूल सी कोमल वो,

कभी कांटे सी कठोर वो;

कभी मीरा की भक्ति वो,

कभी दुर्गा की शक्ति वो।

प्रेम, त्याग,समर्पण, और विश्वास है नारी,

टूटी हुई उम्मीदों की एक प्रबल आस है नारी;

भोर की सुखद वंदना,

संध्या की झिलमिल आरती है नारी,

इंद्रधनुष सी सप्तरंगी, विधाता की

श्रेष्ठतम चित्रकारी है नारी

ना नारी का दिल दुखाओ तुम,

इनके बल पर जग चलता है,

अपने पुरुषार्थ पर नाज करनेवाला

पुरुष भी तो नारी की गोद में पलता है।

सदा औरों के लिए जीनेवाली,

मत उसको तुम धिक्कार दो,

त्याग, समर्पण के बदले,

उसको उसका सम्मान दो।

जो प्यार तुम्हें मिला उससे,

उसको वैसा ही प्यार दो;

जिस हक की वो अधिकारी है,

उसको वो अधिकार दो।।

रेखा जाजोदिया

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अल्बर्ट आइन्स्टीन 

साहित्य समाजहम भारतीयों के आभारी है,
जिन्होने हमें गिनना सिखाया
जिसके बिना किसी भी तरह की
वैज्ञानिक खोज सम्भव ही नहीं थी.

© 2023 by Prawasi Chetana 

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